Tuesday, 26 January 2021

Report By - ड्यूक | क्या कहता है, हमारा संविधान

                     (भारतीय संविधान)
नमस्कार मैं बन्टी यादव....  72 वें गणतंत्र दिवस की आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं..... 
आज हम पूरे देश में गणतंत्र दिवस को बडी धूम-धाम से मना रहे हैं..... कहीं नुक्ति, मिठाईयां तो कहीं लड्डु बांट कर इस पर्व को ओर खास बना रहे हैं.... तो चलिए आज हम बात करते हैं.. संविधान की ( कब, क्यों और कैंसे बना ) हमारा भारती संविधान...
26 नवम्बर 1949 से शुरू हुए इस संविधान निर्माण को आज 71 साल पूरे हो गए हैं.... और 72 वां गणतंत्र दिवस राष्ट्रीय पर्व के रूप में हम मना रहे हैं... हिन्दूस्तान की यह परमरा रही है कि राष्ट्रीय पर्व के मौके पर कोई विदेशी मैहमान को मुख्य अतीथि के रूप में बुलाया जाता है.... पर इस बार ऐसा नही हुआ... 1966 के बाद यह पहली बार है.... दरअसल कोरोना काल को देखते हुए ऐसा हुआ है.... 
भारत का जो संविधान है वो भारत का एक सर्वोच्च विधान है.. जबकि गणतंत्र दिवस की अगर हम बात करें तो यह भारत का एक राष्ट्रीय पर्व है.. जो हर साल 26 जनवरी के रूप में मनाया जाता है.... इसी दिन 1950 को भारत सरकार अधिनियम एक्ट 1935 को हटाकर भारत का संविधान लागू किया था.... एक स्वतंत्र गणराज्य बनने और देश में कानून का राज्य स्थापित करने के लिए 26 नवम्बर 1949 को भारतीय संविधान सभा ने इसे अपनाकर 26 जनवरी 1950 को एक लोकतांत्रिक सरकार प्रणाली के माध्यम से इसे लागू किया था.. वहीं अगर हम बात करें इस दिन की तो 26 जनवरी का यह दिन इस लिए भी खास है क्योंकि इसी दिन 1935 में कांग्रेस पार्टी ने भारत को एक पूर्ण स्वराज घोषित किया था....
दरअसल औपचारिक रूप से एक संविधान सभा ने हमारे भारतीय संविधान को बनाया था जिसे.. अविभाजित भारत में निर्वाचित किया था.. इसकी जो पहली बैठक थी वो 9 दिसंबर 1946 को हूई थी... और फिर पुनः इसकी दुसरी बैठक हुई जो कि 14 अगस्त 1947 को विभाजित भारत के रूप में हुई... साथ ही इसका सदस्य बनने के लिए 1935 में स्थापित प्रांतीय विधान सभा की बैठक हूई जिसके सदस्यों ने अप्रत्यक्ष विधि के माध्यम से संविधान सभा के सदस्यों का चुनाव कराया... इस बैठक का उद्देश्य यह था कि.... 
1. प्रत्येक प्रांत देशी रियासत या रियासतों के समूह को उनकी जनसंख्या के आधार पर सीटें दी गईं.... इस दौरान मौटे तौर पर दस लाख की जनसंख्या पर एक सीट का अनूपात रखा गया था... परिणामस्वरूप ब्रिटिश सरकार के प्रत्यक्ष शासन वाले प्रांतों को 292 सदस्य चुनने थे.... जिसमें से देशी रियासतों को 93 सीटें आवंटित की गईं थी....
2. प्रत्येक प्रांत की सीटों को तीन समुदायों 1. मुसलमान 2. सिख 3. और सामान्य को उनकी जनसंख्या के आधार पर बांटा गया था....
3. प्रांतीय विधान सभाओं में प्रत्येक समुदाय के सदस्यों ने अपने प्रतिनिधियों को चुना.... और इसके लिए उन्होने समानुपातिक प्रतिनिधित्व और एकल संक्रमण पद्धति का उपयोग किया था....
4. देशी रियासतों के प्रतिनिधियों के चुनाव का तरीका उनके परामर्श से तय किया गया था.....
संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को भारतीय संविधान
सुपुर्द करते हुए डॉ. भीमराव आंबेडकर तश्वीर 26 नवम्बर 1949 की

           भारत विभाजन के बाद का संविधान
तो चलिए हम आपको भारत विभाजन के बाद का संविधान बताते हैं.... दरअसल 3 जून 1947 की योजना के अनुसार देश के विभाजन के बाद वे सभी प्रतिनिधि संविधान सभा के सदस्य नही रहे जो अविभाजित पाकिस्तान के क्षेत्रों से चुनकर आये हुए थे.... जिसके बाद संविधान सभा के वास्तविक सदस्यों की संख्या जो थी वो घटकर 299 रह गई.... इस दौरान जब अंतिम रूप से पारित संविधान पर हस्ताक्षर किए जा रहे थे... तब 26 नवंबर 1949 को कुल 284 सदस्यों ने ही संविधान पर हस्ताक्षर किए..... इस प्रकार विभाजन से उपजी विभीषिका और हिंसा के बीच संविधान का निर्माण हुआ..... भारत के संविधान ने नागरिक्ता की एक नई अवधारणा प्रस्तुत की है... जिसमें अल्पसंख्यक न केवल सुरक्षित हुए बल्कि धार्मिक पहचान का नागरिक अधिकार भी उनको मिला.... इसके अलावा संविधान सभा में उस समय के अनुसूचित वर्गों के 26 सदस्यों को भी शामिल किया गया था.. जहां तक राजनीतिक दलों की बात है.... विभाजन के बाद संविधान सभा में कांग्रेस पार्टी का पर्चश्व था... और उस समय उसे 82 सीटें मिली थीं.... संविधान सभा की सामान्य कार्यविधि में भी सार्वजनिक विवेक का महत्व स्पष्ट दिखाई देता था.... इसी तरह विभिन्न मुध्दों के लिए संविधान सभा की आठ मुख्य कमैटियां बनी हुई थीं... जिसमें आम तौर पर ( पंडित जवाहरलाल नेहरू, राजेंद्र प्रसाद, सरदार बल्लभ भाई पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद, और डाक्टर भीमराव आम्डेकर ) इन कमैटियों की अध्यक्षता करते थे.. ये सब कई मुध्दों पर एक-दूसरे से असहमत होने के बाद भी साथ मिलकर काम काम करते थे....
भारतीय संविधान सभा के वो चार मूल तत्व जो संविधान की आत्मा हैं.....

1. संविधान की शक्ति का स्त्रोत देश की जनता है
2. भारत की प्रक्रति प्रभुत्व-संपन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य है
3. संविधान का उध्देश्य- न्याय, स्वतंत्रता, समता बंधुत्व
4. भारतीय संविधान को 26 नवंबर, 1949 में भारतीय जनता ने अपनाया 
                     कहता है, हमारा संविधान

भारत ब्रिटेन के अधिकारों में आने वाले भारतीय क्षेत्रों, देशी रियासतों और देशी रियासतों के बहार के ऐसे क्षेत्र जो हमारे संघ का अंग बनना चाहते हैं.... का एक संघ होगा....
संघ की इकाईयां स्वायत्त होंगी.... और उन सभी शक्तियों का प्रयोग और कार्यों का संपादन करेगा..... जो संघीय सरकार को नही दी गई हैं....
संप्रभु और स्वतंत्र भारत तथा इसके संविधान की समस्त शक्तियों और सत्ता का स्त्रोत जनता है.... 
भारत के सभी लोगों को सामाजिक, आर्थिक, और राजनीतिक न्याय कानून के समक्ष समानता, प्रतिष्ठा और अवसर की समानता तथा कानून और सार्वजनिक नैतिक्तओं की सीमाओं में रहते हुए.... भाषण, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म, उपासना, व्यवसाय, संगठन और कार्य करने की मौलिक स्वतंत्रता की गारंटी और सुरक्षा दी जायेगी....
अल्पसंख्यकों, पिछडे व जनजातीय क्षेत्र, दलित व अन्य पिछडे वर्गों को समुचित सुरक्षा दी जायेगी...
गणराज्य की क्षैत्रीय अखंडता तथा थल, जल, और आकाश में इसके संप्रभु अधिकारों की रक्षा सभ्य राष्ट्रों के कानून और न्याय के अनुसार की जायेगी...
विश्व शांती और मानव कल्याण के विकास के लिए देश स्वेच्छा पूर्वक और पूर्ण योगदान करेगा.....
हमारा संविधान 2 बर्ष 11 माह और 18 दिन में बनकर तैयार हुआ था... यह भारत का सौभाग्य ही था जो हमारी संविधान सभा ने संकुचित द्रष्टिकोण छोडकर संपूर्ण विश्व से सर्वोत्तम चीचों को ग्रहण किया है... ऐसे ही कुछ देश जहां से हमारे संविधान के लिए प्रवधान लिए गये हैं.....
ब्रिटेन -
 सर्वाधिक मत के आधार पर चुनाव में जीत का फैसला
 सरकार का संसदीय स्वरूप 
 कानून के शासन का विचार 
 विधायिका में अध्यक्ष का पद और उनकी भूमिका 
 कानून निर्माण की विधि
 
संयुक्त राज्य अमेरिका - 
 मौलिक अधिकारों की सूची
 न्यायिक पुनरावलोकन की शक्ति और न्याय पालिका की स्वतंत्रता
आयरलैण्ड - 
 राज्य के नीति निर्देशक तत्व
 राज्य सभा के सदस्यों का नामाकंन
फ्रांस –
 स्वतत्रता, समानता, और बंधुत्व का सिद्धांत
कनाडा – 
 एक अर्द्ध संघात्मक सरकार का स्वरूप जिसे (सशक्त कैंद्रीय सरकार वाली संघात्मक व्यवस्था) भी कहते हैं.....
 अपशिष्ट शक्तियों का सिद्घांत 
जर्मनी -
 आपातकाल का सिद्धांत 
दक्षिण अफ्रीका –
 संविधान संशोधन कि प्रक्रिया
रूस - 
 मूल कर्तव्य
आस्ट्रेलिया - 
 समवर्ती सूची

Sunday, 24 January 2021

रिपोर्ट बाई ड्यूक || भोपाल में यादव एजुकेशन सोसायटी ने लिए नए निर्णय

       यादव एजुकेशन सोसायटी के कार्यकर्ता एक फ्रेम में..

भोपाल | बन्टी यादव
राजधानी भोपाल में आज यादव एजुकेशन सोसायटी ने रचना नगर में बैठक की जिसमें यादव समाज के कई लोगों ने हिस्सा लेकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। वहीं इस दौरान समाज के बरिष्ठ जनों ने समाज में पनप रहीं कुरीतियों की और भी ध्यान देने के बात कही। दरअसल यादव एजुकेशन सोसायटी शिक्षा के क्षेत्र में यादव समाज को आगे लाने का काम कर रही है। इस सोसायटी के द्वारा गांव, कस्बों और शहरों से आये होनहार छात्र-छात्राओं को फ्री रहने खाने के लिए छत्रावास उपलब्ध कराना है। वहीं इस सोसायटी को सफल बनाने के लिए समाज के लोग बढ़-चढ़कर अपना सहयोग दे रहे हैं। इस दौरान बैठक की अध्यक्षता कर है। NS यादव ने कहा की यह सोसाइटी सिर्फ मध्यप्रदेश तक ही सीमित नही है, इसमें जो लोग बाहर के हैं वो भी जुड़ रहे हैं और यादव समाज के भविष्य को एक नई दिशा और ऊर्जा देने का काम कर रहे हैं। हम ऐसे सज्जनों का हार्दिक स्वागत करते हैं। हम सब मिलकर इस काम को ओर तेजी से करने पर विचार विमर्श कर रहे हैं साथ ही बहुत जल्द समाज का छत्रावास बनकर तैयार भी हो जाएगा।  
 
 

Wednesday, 25 November 2020

REPORT BY- #DUKE || देश में बढ़ते कोरोना को देखते हुए गृह मंत्रालय ने जारी की 1 दिसंबर से लागू होने वाली कोरोना की नई गाइडलाइंस

दिल्ली: 
देश में बढ़ते कोरोना के मामलों को देखते हुए गृह मंत्रालय ने एक दिसंबर से लागू होने वाली अनलॉक प्रक्रिया के लिए नई गाइडलाइंस जारी की हैं। दिशानिर्देशों का मुख्य फोकस COVID-19 के प्रसार के खिलाफ हासिल किए गए पर्याप्त लाभ को बढ़ाना है। इसके अलावा कुछ राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में बढ़ते नए मामलों को ध्यान में रखते हुए त्यौहारों के मौसम और सर्दियों की शुरुआत में यह जोर दिया गया है कि महामारी को पूरी तरह से दूर करने के लिए सावधानी बनाए रखने और निर्धारित रणनीति का सख्ती से पालन करने की आवश्यकता है।



Saturday, 21 November 2020

REPORT BY- #DUKE ||

मध्यप्रदेश शासन के सख़्त आदेश के बाद पुलिस प्रशासन के आला अधिकारी मास्क न पहन ने पर चालान काट रहे हैं।
भोपाल -
बन्टी यादव/ड्यूकन्यूज़

Sunday, 9 August 2020

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्राथमिक सहकारी समिति लटेरी के कृषक सदस्य से कहा, आप मेरा एक काम करेंगे.. #ड्यूकन्यूज़ #ड्यूक

भोपाल -
बन्टी यादव/ड्यूकन्यूज़
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्राथमिक सहकारी समिति विदिशा जिले की  लटेरी के कृषक सदस्य एवं प्रबंधक को उत्कृष्ट कार्य करने के लिए बधाई और शुभकामनाएं दी। इस दौरान प्रधान मंत्री ने मुकेश पटेल से कहा " मुकेश जी 'मैं' समझता हूँ' आप जो कदम उठा रहे हैं आप बधाई के पात्र हैं, इसके आगे उन्होंने कहा, देखिए मेरा एक काम करेंगे आप, सरकार किसानों का ब्याज भी कम कर रही हैं, बहुत बड़ी मात्रा में धन भी दे रही है और आप जैसे पड़े लिखे किसान जब इसका नेतृत्व करते हैं तो कितना बड़ा बदलाव आता है, लेकिन क्या आप किसानों को समझायेंगे की हमे हमारी धरती माता को भी बचाना है जिस प्रकार से हम आंख बंद कर के अनाप-शनाप यूरिया का उपयोग करते हैं, पूरी धरती माता हमारी तबाह हो रही है। तो हमारे किसान कम से कम आपके जो ग्यारह सौ, बारह सौ किसान हैं वो ये तय कर सकते हैं की अभी अगर वो पांच थैली यूरिया लेते हैं आगे से वो काम से कम तीन थैली में ही काम चला लेंगे।
दरअसल पीएम मोदी आज किसानों से लाइव टेलीकास्ट के माध्यम से ऑनलाइन बात कर रहे थे, इस दौरान सहकारी समिति लटेरी विदिशा के कृषक सदस्य एवं प्रबंधक ने प्रधानमंत्री मोदी से हुई बात-चीत के दौरान कहा कि लटेरी तहसील स्तर पर पांच हज़ार मीट्रिक टन का गौदाम और ग्रेडिंग प्लांट सूचना केंद्र और ई-मंडी बनाने का सोच रहे हैं जिससे की इस क्षेत्र के किसान अपनी फसल को तुरंत न बेंचकर उनकी आवयकता अनुसार बाजार में बैंच सकते हैं। जिसके बाद पीएम मोदी ने मुकेश पटेल को बधाई देते हुए कहा आप बधाई के पात्र हैं। बता दें इस बीच नाबार्ड भोपाल के क्षेत्रीय कार्यालय में कृषि मंत्री कमल पटेल भी मौजूद थे।


 

Thursday, 21 May 2020

BY- #DUKE || लक्ष्य भले ही पूरा हो गया हो फिर भी किसानों का पूरा गेहूं खरीदा जायेगा : मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान

◆ इस साल मध्यप्रदेश में लक्ष्य से ज्यादा हुआ गेहूँ उपार्जन

◆ इस वर्ष 100 लाख मीट्रिक टन गेहूं उपार्जन के निर्धारित लक्ष्य के स्थान पर अभी तक 104 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा जा चुका है।
◆ किसान धैर्य रखें उनका पूरा गेहूं सरकार खरीदेगी : सीएम शिवराज

BY- #DUKE || लक्ष्य भले ही पूरा हो गया हो फिर भी किसानों का पूरा गेहूं खरीदा जायेगा : मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान 
भोपाल :
मध्यप्रदेश में समर्थन मूल्य पर लक्ष्य से ज्यादा गेहूं उपार्जन हो चुका है। इस वर्ष 100 लाख मीट्रिक टन गेहूं उपार्जन के निर्धारित लक्ष्य के विरूद्ध अभी तक 104 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा जा चुका है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि लक्ष्य भले ही पूरा हो गया हो परन्तु किसानों का पूरा गेहूं खरीदा जायेगा। किसानों को चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं है। आगे खरीदी की सभी व्यस्थाएं की जा रही हैं। किसान धैर्य रखें उनका पूरा गेहूं सरकार खरीदेगी।
साथ ही उन्होंने कहा 
अभी तक समर्थन मूल्य पर लगभग 13 लाख किसानों से ये गेहूं खरीदा गया है। खरीदे गये गेहूं का सुरक्षित भंडारण भी किया गया है। गेहूं खरीदी के विरूद्ध 10 लाख 32 हजार किसानों के खातों में 11 हजार 860 करोड़ रूपये की राशि ट्रांसफर की जा चुकी है। कोरोना संकट के होते हुए भी मध्यप्रदेश में गेहूं उपार्जन के लिए जो व्यवस्था की गई थी उसी का सुफल है कि लक्ष्य से अधिक गेहूं खरीदी की गई है। जितने किसानों ने समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी के लिए पंजीयन कराया है उनके गेहूं खरीदने की व्यवस्था की जायेगी। समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन के क्षेत्र में मध्यप्रदेश आज देश के प्रमुख राज्य के रूप में दूसरे नंबर पर पहुंच गया है। 

गेहूं उपार्जन के साथ त्वरित गति से भंडारण पर भी विशेष ध्‍यान दिया गया है कि ताकि बरसात के पूर्व पूरे गेहूं का सुरक्षित भंडारण हो सके। गेहूं का उपार्जन जब कोरोना के कारण देर से प्रारंभ हुआ था तब ऐसी आशंका व्यक्त की गई थी की शायद उपार्जन का लक्ष्य ही पूरा न हो सके लेकिन मध्यप्रदेश सरकार की व्यवस्‍थाओं ने इन आशंकाओं निर्मूल साबित करते हुए लक्ष्य से अधिक गेहूं उपार्जन का रिकार्ड बनाया है।

Saturday, 16 May 2020

REPORT BY- #DUKE || 10वीं की बचीं परीक्षाएं नही लेगा एमपी बोर्ड, 12वीं की परीक्षाएं 8 जून से 16 जून 2020 के बीच होंगी।

REPORT BY- #DUKE जस्टिस दीपक गुप्ता ने कहा- देश की कानून व्यवस्था अमीर और ताकतवर लोगों के पक्ष में हो गई है। #DUKENEWS
एमपी सीएम शिवराज सिंह चौहान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये एमपी बोर्ड परीक्षाओं के बारे में बताते हुए

REPORT BY- #DUKE || 10वीं की बचीं परीक्षाएं नही लेगा एमपी बोर्ड, 12वीं की परीक्षाएं 8 जून से 16 जून 2020 के बीच होंगी।
1. मैरिट लिस्ट के आधार पर तैयार होगा 10वीं का रिजल्ट
2. ट्यूशन फीस के अलावा किसी प्रकार की फीस नही लेंगे विद्यालय

एमपी/भोपाल:
                 माध्यमिक शिक्षा मंडल मध्यप्रदेश ने 10वीं और 12वीं की बचीं परीक्षाओं लेकर बड़ा बदलाव किया है। इस साल कोरोना महामारी के 25 अप्रैल से लॉकडाउन चल रहा है इस कारण हाई स्कूल एवं हायर सेकंडरी स्कूल के बच्चों की बची परीक्षाएं नही हो पाईं हैं। परीक्षाओं को लेकर शनिवार रात मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये बड़ा एलान किया है। सीएम ने कहा है, 10वीं की जो शेष परीक्षाएं बचीं हैं वो साल माध्यमिक शिक्षा मंडल उन परीक्षाओं को नही कराएगा। कक्षा 10 के जो पेपर हो गए हैं उनके आधार पर मेरिट लिस्ट तैयार कर उन विषयों के आगे पास लिखा जाएगा। इस आधार पर 10वीं का रिजल्ट तैयार होगा।
साथ ही 12वीं कक्षा के जो पेपर बचे हैं उनकी परीक्षाएं 8 जून से 16 जून के बीच कराई जाएंगी।
           ||विद्यालय केबल ट्यूशन फीस ले सकेंगे|| 
इसके बाद शिवराज सिंह चौहान ने कहा- 15 अप्रैल से लॉकडाउन शुरू हुआ है, जब तक चलेगा तब तक के बीच में सभी विद्यालय केबल ट्यूशन फीस ले सकेंगे, इसके अलावा कोई विद्यालय विद्यार्थियों से किसी प्रकार की फीस नही लेंगे, चाहे वो बस किराया हो, लाइब्रेरी फीस हो या फिर अन्य किसी प्रकार की कोई फीस स्कूल नही लेंगे।